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चैत्र माह (चेत)

नव वर्ष :- चैत्र सुदी (शुक्ल पक्ष)  एकम् को नया साल विक्रम संवत लगता है।
रामनवमी :- चैत्र सुदी (शुक्ल पक्ष ) की नवमी को भगवान श्री रामचन्द्र का जन्म हुआ था अतएव इस दिन हम रामनवमी का पर्व मनाते हैं।
हनुमान जयंती :- चैत्र सुदी (शुक्ल पक्ष ) की पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाईजाती है।

वैशाख माह

सापदा का डोरा :- यह डोरा होली के दूसरे दिन (छारंडी) घर की सभी औरतों द्वारा लिया जाता है। इस डोरे को वैशाख बदी(कृष्ण पक्ष) में अच्छा दिन देखकर खोलना चाहिए।
आखा तीज :- यह वैशाख सुदी (शुक्ल पक्ष) की तीज को आती है। इस दिन भगवान श्री बद्रीनाथ जी का पट खुलता है। यह दिन अबूझ मुहूर्त के रूप में भी माना जाता है। इस दिन सभी घरों में मूँग एवं चावल की खिंचड़ी बनती है।

ज्येष्ठ माह (ज्येठ माह)

निर्जला एकादशी :- ज्येष्ठ सुदी (शुक्ल पक्ष) की एकादशी को निर्जला एकादशी के रूप में मनाई जाती है। इस दिन व्रत बिना जल ग्रहण के किया जा सके तो उत्तम है अन्यथा फलाहार लेकर भी किया जा सकता है।

आषाढ़ माह (साढ़ माह)

देव शयनी एकादशी :- आषाढ़ सुदी (शुक्ल पक्ष) की एकादशी को देव सो जाते हैं। अतएव इस दिन के बाद कोई भी शुभ कार्य विवाह आदि नहीं किये जाते हैं। कार्तिक सुदी (शुक्ल पक्ष)की एकादशी को देव उठते हैं।अतएव उस दिन से सभी शुभ कार्य विवाह आदि किये जा सकते हैं।

श्रावण माह (सावण माह)

शिव आराधना :- यह माह शिव आराधना का है। अतएव श्रावण के सभी सोमवारों को शिव व्रत किये जाते हैं।
मंगला गौरी व्रत :- श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत किया जाता है। सोलह या बीस मंगलवार करने के बाद इसका उजमन भी किया जाना चाहिए।
नाग पंचमी :- श्रावण बदी (कृष्ण पक्ष) की पंचमी को नाग पंचमी मनाई जाती है। उसके एक दिन पहले बनाई गयी ठंडी रसोई उस दिन खाई जाती है।
तीज का सिंधारा :- श्रावण सुदी (शुक्ल पक्ष) की तीज को मेंहंदी लगाकर सभी बहु-बेटियों का सिंधारा (लाड-प्यार) किया जाता है।
रक्षा बन्धन :- श्रावण सुदी (शुक्ल पक्ष) की पूर्णिमा को राखी का त्यौंहार मनाया जाता है। इस दिन बहिनें अपने भाईयों के राखी बाँधती है एवं भाई बहिनों को नकद या उपहार देते हैं।

भाद्रपद माह (भादवा माह)

हड़ताली तीज :- भादवा बदी (कृष्ण पक्ष) की तीज के दिन घर की बहुओं का सिंधारा किया जाता है एवं बहुएँ बाणा निकालकर सासुओं के आशीर्वाद लेती हैं।
गुगा पंचमी :- भाद्रपद बदी (कृष्ण पक्ष) की पंचमी को दीवार पर गेरू से पोतकर,गुगा माँडकर, पूजा करते हैं।
चाना छठ :- भाद्रपद बदी (कृष्ण पक्ष) की छठ को कुँआरी लड़कियाँ व्रत करती हैं। चन्द्रमा उगने पर चन्द्रमा का दर्शन कर भोजन ग्रहण करती है।
जन्माष्टमी :- भाद्रपद बदी (कृष्ण पक्ष) की अष्टमी श्री कृष्ण भगवान का जन्म दिन है। इस दिन भी व्रत किया जाता है। रात्रि 12-00 बजे श्री कृष्ण जी की पूजा करके व्रत प्रसाद लेकर खोलते हैं। धनिया की पंजीरी एवं पंचामृत का प्रसाद बनाया जाता है।
गुगा नवमी :- भाद्रपद बदी (कृष्ण पक्ष) की नवमी को गुगा नवमी मनाते हैं। इस दिन राखी खोलकर गुगा पर चढ़ाकर पूजा की जाती है।
बछबारस :- भाद्रपद बदी (कृष्ण पक्ष) की बारस के दिन बछबारस के रूप में मनाते हैं। इसमें बाजरे की बनी ठण्डी रसोई खाते हैं। बेटा होने या बेटे की शादी हो जाने के बाद उजमन भी किया जाता है।
अमावस्या :- भाद्रपद बदी (कृष्ण पक्ष) की अमावस्या को पितरों को जात, वं धोक लगाई जाती है। इसी दिन श्री राणी सती जी / श्री ढ़ाँढ़ण सती / श्री धोली सती / श्री खेमी सती तथा अन्य सतियों की जात लगाकर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
गणेश चतुर्थी :- भाद्रपद सुदी (शुक्ल पक्ष) की चतुर्थी को श्री गणेश जी का जन्म दिन है। इस दिन श्री गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसी दिन लड़कों का सिंधारा भी किया जाता है।
दुबड़ी सात् :- भाद्रपद सुदी (शुक्ल पक्ष) की सप्तमी को मनाई जाती है।इस दिन घर की औरतें ठण्डा खाना खाती है।
राधाष्टमी :- भाद्रपद सुदी (शुक्ल पक्ष) की अष्टमी के दिन श्री राधा जी का जन्म दिन मनाया जाता है।

आश्विन माह (आसोज माह)

श्राद्ध :- श्राद्ध भाद्रपद सुदी (शुक्ल पक्ष) की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन बदी (कृष्ण पक्ष) की अमावस्या तक रहते हैं। इसमें स्वर्गवास हुए अपने पूर्वजों की पुण्य तिथि के अनुसार श्राद्ध मनाया जाता है। पुरूष के श्राद्ध में ब्राह्मण एवं स्त्री के श्राद्ध में ब्राह्मणी को भोजन करवाकर यथासम्भव दान दिया जाता है। मातामह श्राद्ध (नान पड़वा) अमावस्या के दिन किया जाता है।
आशा भोती का व्रत :- यह व्रत आश्विन बदी (कृष्ण पक्ष) की अष्टमी के दिन से शुरू करके आठ दिन तक किया जाता है।
शारदीय नवरात्रा :- शारदीय नवरात्रा आश्विन सुदी (शुक्ल पक्ष) की एकम् से नवमी तक, श्री भगवती का पाठ बैठाकर पूजा-अर्चना की जाती है। साथ में इन दिनों में नवरात्रों का व्रत भी किया जाता है।
दशहरा :- आश्विन सुदी (शुक्ल पक्ष) की दशमी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री रामचन्द्र जी ने रावण का वध किया था।
शरद पूर्णिमा :- आश्विन सुदी (शुक्ल पक्ष) की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। इस दिन खीर बनाकर रात भर छत भर रखी जाती है एवं सुबह भगवान को भोग लगाकर इसका प्रसाद बाँटा जाता है। इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने महारास किया था।

कार्तिर्कक माह (कातिक माह)

कार्तिक का व्रत / तारा भोजन :- कार्तिक का व्रत / तारा भोजनः- कार्तिक बदी (कृष्ण पक्ष ) की पूर्णिमा से लेकर आश्विन बदी (कृष्ण पक्ष) की पूर्णिमा तक, रोज सुबह गंगा स्नान किया जाता है एवं क्षमतानुसार व्रत भी किया जाना चाहिए|
तारा भोजन :- कार्तिक बदी (कृष्ण पक्ष) की पूर्णिमा से लेकर आश्विन बदी (कृष्ण पक्ष) की पूर्णिमा तक व्रत किया जाता है। इसमें रात्रि में तारा देखकर भोजन ग्रहण किया जाता है।
करूवा चौथ :- कार्तिक बदी (कृष्ण पक्ष) की चतुर्थी को यह व्रत सभी विवाहित औरतें करती है। इस व्रत में रात्रि में चन्द्रमा का दर्शन करके भोजन किया जाता है।
होई सात् :- कार्तिक बदी (कृष्ण पक्ष) की सप्तमी को होई सात् का व्रत किया जाता है। इसमें बेटा होने या बेटे की शादी हो जाने बाद इसका उजमन भी किया जाता है।
धनतेरस :- कार्तिक बदी (कृष्ण पक्ष) की तेरस को मनाई जाती है।इसमें यम देव के दीपक की पूजा की जाती है एवं बाजार से नया बर्तन या चाँदी का कोई भी सामान खरीदा जाना चाहिए।
छोटी दिवाली :- कार्तिक बदी (कृष्ण पक्ष) की चौदस को छोटी दिवाली मनाई जाती है। इस दिन को रूप चौदस भी कहते हैं। इस दिन सभी तेल हल्दी का ऊबटन लगाकर स्नान करते हैं। शाम को दीपकों की पूजा की जाती है।
बड़ी दीवाली :-  कार्तिक बदी (कृष्ण पक्ष) की अमावस्या को बड़ी दीवाली मनाई जाती है। इसमें शाम को दीपों की पूजा की जाती है। रात्रि में मुहूर्त के अनुसार श्री गणेश जी एवं श्री लक्ष्मी जी के साथ खाताबही की भी पूजा की जाती है एवं इसके अगले दिन सभी लोग आपस में एक-दूसरे के गले मिलते हैं एवं छोटे अपने से बड़ों से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं
अन्नकूट :- का कार्तिक सुदी (शुक्ल पक्ष) की एकम् को अन्नकूट की रसोई बनाकर भगवान के भोग लगाकर प्रसाद बाँटा जाता है ।
गोवर्धन पूजा :- कार्तिक सुदी (शुक्ल पक्ष) की एकम् को गोवर्धन माँढ़कर इसकी पूजा की जाती है।
भैया दूज :- कार्तिक सुदी (शुक्ल पक्ष) की दूज को मनाई जाती है।इसमें बहन भाई को भोजन करवाकर तिलक निकालती है एवं भाई बहन को नकद या उपहार देता है।
छठ माई :-  कार्तिक सुदी (शुक्ल पक्ष) की छठ को छठ माही का व्रत किया जाता है। इसमें उगते हुए सूर्य को अर्क दिया जाता  है।
गोपाष्टमी :- कार्तिक सुदी (शुक्ल पक्ष) की अष्टमी को मनाई जाती है।इस दिन गाय की पूजा की जाती है।
आँवला नवमी :- कार्तिक सुदी (शुक्ल पक्ष) की नवमी को आँवला के पेड़ की पूजा की जाती है।
देव उठनी कादशी :- कार्तिक सुदी (शुक्ल पक्ष) की एकादशी को देव उठ जाते हैं। अतएव सभी शुभ कार्य विवाह आदि किये जाते हैं।
तुलसी विवाह :- कार्तिक सुदी (शुक्ल पक्ष) की एकादशी तुलसी विवाह के रूप में मनाई जाती है।
श्री खाटूश्याम जन्म दिवस :- कार्तिक सुदी (शुक्ल पक्ष) की एकादशी के दिन मनाया जाता है।
मार्गशीर्ष माह (मंग सिर माह)
श्री राणी सती जी का जन्म :- मार्गशीर्ष बदी (कृष्ण पक्ष) के नवमी के दिन श्री राणी सती जी का जन्म हुआ था। अत एव इस दिन को श्री राणी सती जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है।

पौष माह (पो माह)

मलमास :- यह माह मलमास के रूप में मनाया जाता है। इस महीने में कोई भी शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं। यह अंग्रेजी तारीख के अनुसार 15 दिसम्बर से 14 जनवरी तक रहता है।
मकर संक्रांति :- पौष या माघ के महीने में मकर संक्रांति आती है। यह अंग्रेजी तारीख के अनुसार 14 जनवरी के दिन मनाई जाती है।

माघ माह (मा माह)

माई चौथ :- माघ बदी (कृष्ण पक्ष) की चतुर्थी को महिलायें माई चौथ का व्रत करती है।
बसंत पंचमी :- माघ बदी (कृष्ण पक्ष) की पंचमी को सरस्वती पूजा के रूप में मनाते हैं। यह एक अबूझ मुहूर्त भी है।
सूर्य सप्तमी :- माघ सुदी (शुक्ल पक्ष) की सप्तमी को उगते हुए भगवान सूर्य की पूजा की जाती है।

फाल्गुन माह (फागण माह)

महाशिवरात्रि :- फाल्गुन बदी (कृष्ण पक्ष) की तेरस भ यू वान शिव की बारात का दिन है। इस दिन भगवान शिव की शादी हुई थी। इस दिन व्रत भी रखा जाता है।
श्री खाटू श्याम जी की जात :- फाल्गुन सुदी (शुक्ल पक्ष) की द्वादशी को श्री खाटूश्याम जी की जात लगाकर पूजा-अर्चना की जाती है।इसी माह में फाल्गुन सुदी अष्टमी से द्वादशी तक खाटू में एक विशाल मेला लगता है।
होली का बड़कुल्ला :- होली के पाँच दिन पहले, अच्छा दिन देखकर गोबर से होलिका दहन हेतु बड़कुल्ला बनाया जाता है।
ढ़ूँढ़ का नेग :- गर किसी को इसी वर्ष लड़का हुआ हो तो फाल्गुन सुदी (शुक्ल पक्ष) की एकादशी के दिन उजमन किया जाता है।
होली :- फाल्गुन सुदी (शुक्ल पक्ष) की पूर्णिमा के दिन होलिका दहन के साथ मनाया जाता है।
धुलण्डी :- होलिका दहन के दूसरे दिन हम हर्ष एवं उल्लास के साथ रंग-गुलाल से आपस में खेलते हैं एवं एक-दूसरे के गले मिलते हैं एवं छोटे अपने से बड़ों से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
गणगौर पूजन :- होली के दूसरे दिन से सोलह दिन तक या चैत्र सुदी (शुक्ल पक्ष) की तीज तक घर की कुँआरी लड़कियाँ या नव-विवाहित लड़कियाँ गणगौर की पूजा करती है।
सापदा का डोरा :- यह डोरा होली के दूसरे दिन यानी छारंडी के दिन घर की सभी औरतें लेती हैं।
सूरज रोट का व्रत :- गणगौर पूजने वाली लड़कियाँ किसी भी दिन, रविवार को छोड़कर यह व्रत करती हैं।
बासोड़ा :- होली के सात दिनों बाद किया जाता है। इस दिन शीतला माता की पूजा करके ठण्डा  भोजन किया जाता है।
गणगौर की तीज :- चैत्र सुदी (शुक्ल पक्ष) की तीज के दिन कुँआरी या शादी शुदा सभी स्त्रियाँ गणगौर की पूजा करती है। उस दिन गणगौर का विसर्जन भी किया जाता है।
तीज का सिंधारा :- चैत्र सुदी (शुक्ल पक्ष) की तीज के दिन लड़कियों का सिंधारा किया जाता है।

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